कपालकुंडला

Mahesh Dutt Sharma · AI-narrated by Harish (from Google)
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Audiobook
2 hr 41 min
Unabridged
AI-narrated
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कापालिक ने आग बढ़कर कहा, “फल-मूल जो कुछ है, खा सकते हो। पत्तों का दोना बनाकर पात्र से जल पी सकते हो। व्याघ्रचर्म बिछा हुआ है, सो सकते हो। निडर होकर रहो। यहाँ शेर आदि का डर नहीं। फिर बाद में मुझसे मुलाकात होगी। जब तक मुलाकात न हो, यह झोपड़ी त्यागकर कहीं न जाना।”

यह कहकर कापालिक चला गया। नवकुमार ने थोड़े फल खाये और कुछ कसैले स्वाद के उस जल को पिया। इतना आहार मिलते ही नवकुमार को परम संतोष हुआ। इसके बाद ही वह उस चर्म पर लेट रहे। सारे दिन की मेहनत और जागरण के कारण वह शीघ्र ही निद्रा की गोद में चले गये।


कापालिक ने आग बढ़कर कहा, “फल-मूल जो कुछ है, खा सकते हो। पत्तों का दोना बनाकर पात्र से जल पी सकते हो। व्याघ्रचर्म बिछा हुआ है, सो सकते हो। निडर होकर रहो। यहाँ शेर आदि का डर नहीं। फिर बाद में मुझसे मुलाकात होगी। जब तक मुलाकात न हो, यह झोपड़ी त्यागकर कहीं न जाना।” यह कहकर कापालिक चला गया। नवकुमार ने थ...

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